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Gujoboh आँखों के आराम की हल्की, रोज़ की आदतें
हल्की कसरतें

छह कसरतें, जो दिन के बीच कहीं भी हो सकती हैं

इनमें से कोई भी कसरत एक-दो मिनट से ज़्यादा नहीं लेती और किसी उपकरण की ज़रूरत नहीं। हर कसरत के साथ लिखा है कि उसे आराम से कैसे करें और वह क्या नहीं करती।

शुरू करने से पहले

छह छोटी सावधानियाँ

ये कसरतें बहुत हल्की हैं, फिर भी हर शरीर अलग है। नीचे लिखी बातें एक बार पढ़ लें, खासकर अगर आपकी आँखों का कोई इलाज चल रहा है।

दर्द हो तो वहीं रुकें

कोई भी कसरत दर्द, चक्कर, जलन या धुँधलापन बढ़ाए, तो उसे तुरंत छोड़ दें। असहजता बनी रहे, तो नेत्र-विशेषज्ञ से बात करें।

आँखों पर दबाव नहीं

पुतलियों को उंगलियों से न दबाएँ और न ही ज़ोर से मलें। पामिंग में भी हथेलियाँ सिर्फ़ ऊपर से ढकती हैं।

कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं?

आँखों के पास हाथ ले जाने से पहले हाथ धो लें। लेंस के साथ कोई कसरत असहज लगे, तो उसे छोड़ें और अपने विशेषज्ञ से पूछें।

हाल में सर्जरी या चलता इलाज

मोतियाबिंद, लेसिक या किसी भी आँख की सर्जरी के बाद, या ग्लूकोमा जैसी बीमारी के इलाज के दौरान, कुछ भी नया शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से पूछें।

बच्चे और बड़े-बुज़ुर्ग

बच्चों के साथ इसे खेल की तरह और साथ बैठकर करें। जिन्हें चक्कर आने की आदत हो, वे सभी कसरतें कुर्सी पर बैठकर करें।

गर्भावस्था, डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर

इन स्थितियों में या नियमित दवाएँ लेते समय नज़र में कोई भी बदलाव डॉक्टर को बताएँ। ये आदतें उस जाँच की जगह नहीं लेतीं।

छह कसरतें

हर कसरत: क्या, कैसे और क्या नहीं

क्रम ज़रूरी नहीं है। जो कसरत आपके दिन में आसानी से बैठ जाए, वहीं से शुरुआत करें; कोई भी कसरत ज़बरदस्ती या गिनती पूरी करने के दबाव में न करें।

पलक का ठहराव

स्क्रीन पर ध्यान लगाते समय बहुत से लोग अनजाने में कम और अधूरी पलक झपकाते हैं। यह ठहराव उस पल को याद दिलाने के लिए है।

  1. कंधे ढीले छोड़ें और स्क्रीन से नज़र हटा लें।
  2. धीरे से पलकें पूरी बंद करें, एक पल रुकें, फिर खोलें।
  3. ऐसा कुछ बार करें — उतनी बार, जितना सहज लगे।

क्या नहीं करती: यह सूखी आँख की बीमारी का इलाज नहीं है। सूखापन या किरकिराहट बनी रहे, तो डॉक्टर से मिलें।

Close-up of a blue-grey eye with long lashes under a knitted grey hat

20-20-20

एक जाना-माना, याद रखने में आसान नियम: लगभग हर 20 मिनट पर, करीब 20 फ़ुट (लगभग 6 मीटर) दूर किसी चीज़ को लगभग 20 सेकंड देखें।

  1. कमरे में या खिड़की के बाहर कोई दूर का निशान पहले से चुन लें।
  2. समय होने पर नज़र उठाकर उसी पर टिकाएँ, बिना आँखें सिकोड़े।
  3. साँस सामान्य रखें, फिर आराम से काम पर लौटें।

क्या नहीं करती: यह चश्मे का नंबर नहीं बदलती। यह बस पास के लंबे काम में एक नियमित विराम है।

पास और दूर

नज़र को बारी-बारी से पास और दूर ले जाने की हल्की कसरत। कुछ लोग अँगूठे की जगह उंगलियों का छोटा-सा घेरा बनाकर उसके पार देखना पसंद करते हैं।

  1. अँगूठा आँखों से आराम की दूरी पर, थोड़ा सामने रखें।
  2. कुछ पल अँगूठे को देखें, फिर उसके पार किसी दूर की चीज़ को।
  3. धीरे-धीरे कुछ बार बदलें; आँखों पर ज़ोर लगे तो रुक जाएँ।

क्या नहीं करती: इससे “फ़ोकस की ताकत बढ़ने” या चश्मा उतरने का कोई दावा नहीं किया जा सकता।

Smiling woman in a red sweater making a circle with her fingers around one eye against an orange background

पामिंग

बंद आँखों को कुछ पल का अँधेरा और हथेलियों की हल्की गरमाहट। बहुत से लोग इसे दिन की सबसे सुकून भरी कसरत मानते हैं।

  1. साफ़ हथेलियों को आपस में रगड़कर हल्का गरम करें।
  2. आँखें बंद करें और हथेलियों को कप की तरह उन पर रखें; वज़न गालों और भौंहों की हड्डी पर रहे।
  3. कुछ शांत साँसों तक ऐसे ही रहें, फिर धीरे से हाथ हटाएँ।

क्या नहीं करती: यह किसी नेत्र-रोग को ठीक नहीं करती। पुतलियों पर दबाव डालना इसका हिस्सा कभी नहीं है।

धीमी नज़र

सिर स्थिर रखकर नज़र को धीरे-धीरे कमरे में घुमाना — जैसे किसी नई जगह को आराम से देख रहे हों।

  1. सीधे बैठें और सामने किसी बिंदु से शुरू करें।
  2. नज़र को धीरे से ऊपर, फिर नीचे, फिर दाएँ और बाएँ ले जाएँ।
  3. झटका न दें; चक्कर या खिंचाव लगे, तो आँखें बंद कर आराम करें।

क्या नहीं करती: यह भेंगापन या आँखों की मांसपेशियों की किसी समस्या का इलाज नहीं है; उसके लिए विशेषज्ञ की जाँच ज़रूरी है।

खिड़की से बाहर

खिड़की या बालकनी तक जाकर नज़र को सबसे दूर के बिंदु तक जाने देना — पेड़ों, छतों, बादलों पर बिना जल्दबाज़ी के।

  1. कुर्सी से उठें; चलना भी इस ठहराव का हिस्सा है।
  2. सबसे दूर दिखने वाली चीज़ ढूँढें और नज़र वहाँ टिकने दें।
  3. फिर नज़र को पेड़ों या आसमान पर धीरे-धीरे घूमने दें।

क्या नहीं करती: यह नज़र की जाँच की जगह नहीं लेती। और सूरज की ओर सीधे कभी न देखें।

एक ठहराव का क्रम

पाँच मिनट, पाँच हिस्से

दोपहर के खाने के बाद या किसी लंबी मीटिंग के अंत में यह छोटा क्रम आज़माया जा सकता है। जो हिस्सा असहज लगे, उसे छोड़ दें; एक मिनट का ठहराव भी ठीक है।

  1. पहला मिनट — कुर्सी से उठें, कंधे ढीले करें, कुछ गहरी साँसें लें।
  2. दूसरा मिनट — पलक का ठहराव, बिना जल्दी के।
  3. तीसरा मिनट — खिड़की तक जाएँ और दूर देखें।
  4. चौथा मिनट — पास और दूर, आराम की रफ़्तार से।
  5. पाँचवाँ मिनट — पामिंग, फिर एक गिलास पानी।
जिनसे बचें

धुँधले शीशे पर छह आम गलतियाँ

बाईं ओर वह है जो लोग अक्सर करते हैं, दाईं ओर उसका आसान और सुरक्षित विकल्प।

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आँखें थकें तो ज़ोर से मलना

आँखें बंद करके कुछ पल आराम करें; ज़रूरत हो तो साफ़ हाथों से हल्के छींटे।

पुतलियों पर उंगलियों से दबाना

पामिंग में हथेलियाँ सिर्फ़ ढकती हैं; वज़न गालों और भौंहों की हड्डी पर रहता है।

“कुछ हफ़्तों में चश्मा उतर जाएगा” की उम्मीद

ये आदतें आराम के लिए हैं; नंबर की जाँच और फ़ैसला नेत्र-विशेषज्ञ का काम है।

बताया गया चश्मा पहनना बंद कर देना

चश्मा वैसे ही पहनें जैसा डॉक्टर ने कहा है; पामिंग के समय बस थोड़ी देर उतार लें।

दिन भर कुछ नहीं, फिर शाम को एक लंबी “कसरत”

दिन में बिखरे छोटे ठहराव ज़्यादा सहज रहते हैं और याद भी आसानी से रहते हैं।

दर्द या धुँधलेपन को कसरत से “ठीक” करने की कोशिश

दर्द, लालिमा या नज़र में बदलाव कसरत का नहीं, जाँच का विषय है।

सवाल-जवाब

जो लोग अक्सर पूछते हैं

क्या ये कसरतें चश्मे का नंबर कम कर सकती हैं?

नहीं। चश्मे का नंबर आँख की बनावट से जुड़ा होता है, और ये कसरतें उसे बदलने का तरीका नहीं हैं। इनका मकसद सिर्फ़ पास के लंबे काम के बीच आराम के छोटे पल जोड़ना है।

क्या ये इलाज या दवा की जगह ले सकती हैं?

नहीं। अगर डॉक्टर ने कोई ड्रॉप, दवा या चश्मा बताया है, तो उसे जारी रखें। ये आदतें उसके साथ चल सकती हैं, उसकी जगह कभी नहीं।

किसी कसरत से असहजता हो तो क्या करें?

उसे वहीं रोक दें और आँखें बंद करके आराम करें। अगर दर्द, जलन या धुँधलापन कुछ समय बाद भी बना रहे, तो नेत्र-विशेषज्ञ से मिलें।

दिन में कितनी बार करनी चाहिए?

कोई तय संख्या नहीं है। ज़्यादातर लोगों के लिए दिन भर में बिखरे कुछ छोटे ठहराव काफ़ी सहज रहते हैं। अपनी सुविधा के हिसाब से चलें।

क्या बच्चे भी ये कसरतें कर सकते हैं?

हल्के रूप में, बड़ों के साथ और खेल की तरह — जैसे खिड़की से सबसे दूर का पेड़ ढूँढना। बच्चे की आँखों को लेकर कोई चिंता हो, तो बाल नेत्र-विशेषज्ञ से जाँच कराएँ।

क्या चश्मा या लेंस पहनकर कर सकते हैं?

ज़्यादातर कसरतें चश्मा पहने हुए की जा सकती हैं। पामिंग के लिए चश्मा थोड़ी देर उतार लें। लेंस पहनते हों, तो आँखों के पास हाथ ले जाने से पहले हाथ ज़रूर धोएँ।

क्या अपने मन से आई ड्रॉप डाल सकते हैं?

बेहतर है कि नहीं। कोई भी ड्रॉप, यहाँ तक कि “लुब्रिकेटिंग” ड्रॉप भी, लंबे समय तक इस्तेमाल करने से पहले नेत्र-विशेषज्ञ या फ़ार्मासिस्ट से पूछ लें।

नेत्र-विशेषज्ञ से कब मिलना चाहिए?

नज़र में अचानक बदलाव, दर्द, लगातार लालिमा, दोहरा दिखना या रोशनी की चमक हो, तो जल्दी मिलें; अचानक नज़र जाने पर 112 पर कॉल करें। बिना किसी शिकायत के भी नियमित जाँच कराते रहें। पूरी सूची देखें

क्या ब्लू-लाइट वाला चश्मा ज़रूरी है?

इस पर राय अलग-अलग है और शोध अभी जारी है। कोई खास चश्मा खरीदने से पहले नेत्र-विशेषज्ञ से पूछें। ठहराव, रोशनी और स्क्रीन की दूरी जैसी बुनियादी बातें हर हाल में काम की हैं।

फ़ोन पर लंबे समय तक पढ़ने की आदत हो तो?

अक्षर बड़े करें, फ़ोन को चेहरे से थोड़ा दूर रखें और हर कुछ मिनट पर नज़र उठाकर दूर देखें। रात में अँधेरे कमरे में फ़ोन पढ़ने के बजाय हल्की बत्ती जलाए रखें।

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